अक्सर आध्यात्मिक गुरुओं से, धार्मिक ग्रंथों में पढ़ने को मिलता है कि यह सब जगत मिथ्या है, एक आभास मात्र है, माया से अधिक कुछ नहीं है | आजकल के कुछ अति-शिक्षित व्यक्ति इस अवधारणा का उपहास भी किया करते हैं क्योंकि ये लोग अपनी स्थूल ज्ञानेन्द्रियों को ही अंतिम सत्य मान बैठते हैं | पर ज़रा हम विचार करके देखें तो दिखाई देता है कि टीवी पर हम विभिन्न कलाकारों को चलते फिरते बोलते देखते हैं, उनके साथ हंसते हैं, रोते हैं पर टी वी में जो कुछ दिखाई देता है, वह केवल ध्वनि एवं ... Read More →
यद्यपि ये सही है कि जगत मिथ्या है, माया है पर यह ऐसे ही है जैसे नाटक वास्तविकता नहीं होता, एक छद्म जीवनहोता है जो कलाकार को मंच पर जीना होता है| कलाकार जानते हैं कि वह मंच पर जो कुछ जीवन जी रहे हैं, वह वास्तविक जीवन नहीं है तथापि उनको इस काल्पनिक जीवन को पूरी इमानदारी और तल्लीनता के साथ निभाना है औरऐसे निभाना है कि दर्शक उसे सच मान बैठें, वाह-वाह कर उठें | पर पर्दा गिरते ही वह अपने वास्तविक जीवन में लौट आते हैं | मंच पर नायक और खलनायक एकदूसरे से लड़ते झगड़ते, एक दूसर... Read More →
क्या आपके साथ कभी कुछ ऐसा हुआ है कि रात को सोने से पहले आपको प्यास लगी थी, पानी आ पाता इससे पहले ही आपको नींद आ गई! रात भर नींद में भी प्यास लगती रही, कभी कुँए के पास जाते, कभी झील की ओर, कभी पानी का नलका खोल कर देखते पर पानी कहीं नहीं मिला ! वास्तव में आपकी पानी की प्यास आपकी शारीरिक आवश्यकता है| इस प्यास की संतुष्टि के लिए यह आवश्यक है कि आप बिस्तर से उठ कर रसोई में जाएँ, पानी पियें और तब आकर पुनः सो जाएँ| अब आपको प्यास वाले सपने नहीं आयेंगे! हमारा अवचेतन मन हमारे शरीर... Read More →