शुद्ध संकल्प से किये गये सतकर्म से जो प्राप्त होता हैं वही संतोष धन हैं । वही परम धन हैं । फिर यदि वो भौतिक संपत्ति भी हो तो उससे अहंकार नही आनन्द जी अनुभूति होती हैं । प्रणाम 🙏 सत्य प्रक... Read More →
धन बल औऱ तन बल संपन्न मनुष्य प्रायः किसी अन्य को अपने आगे देखना पसंद नही करता हैं । ये रजो गुणी प्रवृति हैं। हाँ मन बल समृध्द व्यक्ति दूसरों का मनोबल स्वयं बढ़ाकर अग्रिम पंक्ति मे खड़ा देख प्रसन्न होता हैं । ये सतोगुणी प्रवृति हैं । प्रणाम 🙏 सत्य प्रक... Read More →
घर , परिवार, औऱ समाज की रीति, रिवाज, संस्कार कोई बोझ भार नही बल्कि ये सब सुरक्षा कवच हैं जो प्रगति की उड़ान के समय भी अभेद्य किले की तरह व्यक्तित्व मे मौलिकता देकर लक्ष्य तक सुरक्षित पहुचने मे सहयता करते हैं । सत्य प्रक... Read More →
प्रार्थना हे प्रभु ! हे ! परम दाता । तेरा सदा हमे ध्यान हो । भूल कर भी भूल ना हो । ऐसा हमे सद ज्ञान दो॥ स्वीकार कर ले , हर दशा क़ो , बदल ना पाये हम , जिन्हें । बदल सकते हैं स्वयं किंचित , हमे साहस दो बदले उन्हें ॥ समझ सके हम मूल अंतर ॥ ऐसा प्रभु हमे ज्ञान दो॥ 1॥भूल कर भी भूल … कर सक... Read More →
अहंकार (EGO)वास्तव मेँ हमारी असल स्वरूप के इर्द गिर्द हमारे ही द्वारा बुना गया एक बनावटी आवरण मात्र हैं जिसके कारण वो दिखता हैं जो हम हैं ही नही । इसी भ्रमवश हम एक दिन सब कुछ होते हुए भी अकेले पड़ जाते हैं ।अहंकार की अग्नि मे व्यक्ति स्वयं ही नही बल्कि उसका संपूर्ण वंश भस्म हो जा... Read More →