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Sewa Sansthan mobilized youths for Blood Donation

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Saharanpur (12 February)   Sri Ram Krishna Sewa Sansthan today mobilized 61 units of blood in its maiden attempt of organising a Blood Donation Camp here at IMA Bhawan, Hakikat Nagar, Saharanpur.  A large number of self-motivated youths participated in the camp and offered their blood.  The camp got assistance from The Saharanpur Dot Com and Himalayan Institute Hospital Trust, Jollygrant, Dehradun who sent in a team of doctors and technicians to collect the blood. Padmashree Bharat Bhushan, who together with Pt. Suresh Chaitanya,  Dr. S.K. Upadhyay, Pt. Jai Prakash Yagyik, Shri Satya Prakash Sharma and Sushant Singhal paid floral tributes to the holy memory of St. Pathik Ji Maharaj,  congratulated the Sansthan and thesaharanpur dot com for this difficult task of spreading awareness...
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Scholarships to merit holder students

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                    सहारनपुर ।   श्रीरामकृष्ण सेवा संस्थान देश का भविष्य संवारने के लिये यह अनिवार्य मानता है कि श्रेष्ठ प्रतिभाओं को प्रोत्साहन एवं प्रश्रय मिले, सहायता एवं सहयोग मिले !   इसी निमित्त संस्थान ने प्रति वर्ष श्रेष्ठ परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करने की योजना आरंभ की हुई है । इस वर्ष छात्रवृत्ति पाने वाले छात्र-छात्राओं के नाम इस प्रकार हैं – इंटरमीडियेट कक्षा उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं हाई स्कूल कक्षा उत्तीर्ण छात्र उक्त सभी छात्र-छात्राओं ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालिज, सहारनपुर से शिक्षा ग्रहण की है।  सम्मानित किये जा रहे छात्र-छात्राओं को शुभ आशीष स्वरूप संत पथिक छात्रवृत्ति देते हुए संस्थान के संचालक भागवत भूषण पं. जय प्रकाश जी ’याज्ञिक’  ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य क...
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What actions lead us to salvation?

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अंहता, ममता, आसक्ति और कामना से रहित होकर प्रभु प्रीत्यर्थ कर्म करें। यही निष्काम कर्मयोग है। जन्म जन्मान्तर में किये हुये शुभाशुभकर्मों के संस्कारों से यह जीव बन्धा हुआ है तथा इस मनुष्य शरीरमें पुनःअंहता, ममता,आसक्ति अथवा कामना से नये-2 कर्म करके ये जीव ओैर भी अधिक कर्म बन्धसे जकड़ा जाता है।परिणाम में अशान्त और दुःखी रहता है। हम कर्म करते समय ऐसी क्या सावधानी रखें कि हमारा जीवन पूर्णानन्द से परिपूर्ण हो जाये- कायेन वाचामनसेन्द्रियैवा बुद्धयात्मना वाङनुसृतस्वभावात् । करोति यद्यत्सकलं परस्मैनारायणायेति समपयेत् तत्। (श्रीमद्भागवत, 11/2/36) यह श्लोक मेरे बचपन का साथी है – जबमुझको लिखना भी नहीं आता था तब मुझको मेरे पूज्य पितामह ने याद कराया था।  प्रतिदिन इसको भोजन से पूर्व बोलते थे।  आइये,  इसका भाव समझने का प्रयास करें। हम अपने वर्ण, स्वभाव औरगुणानुसार भगवान की आराधना पूजा ...
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Health Checkup Camp & Bhagwat Katha in SRE

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सहारनपुर – श्रीरामकृष्ण सेवा संस्थान (रजि.) के तत्वावधान में श्रीमद्‌ भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन श्री हरिमंदिर, आवास विकास में २० अप्रैल से २७ अप्रैल तक किया गया जिसमें व्यासपीठ पर सुशोभित भागवतभूषण पूज्य पं. जयप्रकाश याज्ञिक ने उपस्थित विशाल जनसमुदाय को अपनी मधुर संगीतमयी वाणी में उनके धर्म / अधर्म, कर्त्तव्य / अकर्त्तव्य का भली प्रकार भान कराया।  कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि विद्वान पंडित जी ने श्रीमद्भागवत्‌ कथा के आख्यान और उपाख्यान की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सामयिकता और उपादेयता को भली प्रकार प्रतिपादित किया।   पंडित जयप्रकाश याज्ञिक ने उपस्थित श्रोताओं को उनके निजी धर्म का तो भान कराया ही, साथ में उनके समाज के प्रति कर्त्तव्यों की भी सहज रीति से अनुभूति कराई। उन्होंने बताया कि भगवा वस्त्र धारण कर लेने वाला हर व्यक्ति साधु नहीं हो जाता।  सच्चे साधु की ...
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