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What actions lead us to salvation?
अंहता, ममता, आसक्ति और कामना से रहित होकर प्रभु प्रीत्यर्थ कर्म करें। यही निष्काम कर्मयोग है। जन्म जन्मान्तर में किये हुये शुभाशुभकर्मों के संस्कारों से यह जीव बन्धा हुआ है तथा इस मनुष्य शरीरमें पुनःअंहता, ममता,आसक्ति अथवा कामना से नये-2 कर्म करके ये जीव ओैर भी अधिक कर्म बन्धसे जकड़ा जाता है।परिणाम में अशान्त और दुःखी रहता है। हम कर्म करते समय ऐसी क्या सावधानी रखें कि हमारा जीवन पूर्णानन्द से परिपूर्ण हो जाये- कायेन वाचामनसेन्द्रियैवा बुद्धयात्मना वाङनुसृतस्वभावात् । करोति यद्यत्सकलं परस्मैनारायणायेति समपयेत् तत्। (श्रीमद्भागवत, 11/2/36) यह श्लोक मेरे बचपन का साथी है – जबमुझको लिखना भी नहीं आता था तब मुझको मेरे पूज्य पितामह ने याद कराया था। प्रतिदिन इसको भोजन से पूर्व बोलते थे। आइये, इसका भाव समझने का प्रयास करें। हम अपने वर्ण, स्वभाव औरगुणानुसार भगवान की आराधना पूजा ... Read More →


