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लोभ और भोग ही आसुरी वृत्ति हैं – याज्ञिक जी महाराज

सहारनपुर (26 मई) : हिरण्यकाक्ष लोभ का प्रतीक है और वराह भगवान यज्ञ स्वरूप हैं। सत्कर्म को ही यज्ञ कहते हैं। सर्वजन हिताय किये जाने वाले कार्य ही यज्ञ हैं। लोभी व्यक्ति असंतोष के कारण सब कुछ होने के बावजूद अशान्त रहता है और मानसिक रूप से पीड़ित रहता है। लोभ पाप की ओर धकेलता है, ...
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आसक्ति से मुक्ति ही सुख का मार्ग – याज्ञिक जी महाराज

सहारनपुर – 25 मई – श्री मंगलेश्वर महादेव मंदिर, मंगल नगर के प्रांगण में चल रहे सप्ताह भर के श्रीमद्‍ भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन विषय को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास पं. जयप्रकाश याज्ञिक ने बताया कि समस्त दुःखों, क्रोध और अशान्ति का मूल हमारे अन्दर मौजूद आसक्ति की भावना है। जी...
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श्री मंगलेश्वर मंदिर प्रांगण में व्यासपीठ पर विराजमान भागवत भूषण पं. जयप्रकाश जी याज्ञिक

श्री राधा कृष्ण का समन्वित अवतार है श्रीमद् भागवत – याज्ञिक जी महाराज

सहारनपुर (24 मई) :  जेठ की झुलसाती गर्मी से जिस प्रकार वर्षा ने हर किसी को राहत दी है, उसी प्रकार से आज मंगल नगर के मंदिर में व्यासपीठ पर विराजमान भागवत भूषण पं. जय प्रकाश जी याज्ञिक ने श्रीमद्‍भागवत कथा की संगीतमयी अमृत वर्षा करके सभा स्थल पर मौजूद सैंकड़ों श्रद्धालुओं के हृदय...
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आगामी कार्यक्रम

आपको सूचित करते हुए प्रसन्नता है कि ब्रह्मलीन संत पथिक जी महाराज के सूक्ष्म संरक्षण में  श्री रामकृष्ण सेवा संस्थान के आगामी कार्यक्रम निम्न प्रकार प्रस्तावित हैं। योग्य छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति : 29 मार्च, 2016 – प्रातः 8 बजे। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी सेवा संस्थान...
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आत्मा का परमात्मा से मिलन ही रास है – याज्ञिक जी

श्री शनिधाम मंदिर बहादुरपुर खिज़राबाद, यमुनानगर में आयोजित श्रीमद्‍ भागवत्‍ कथा सप्ताह ज्ञानयज्ञ में पधारे परमसंत स्वामी पथिक शिष्य भागवतभूषण आचार्य पं. जय प्रकाश जी याज्ञिक ने आज गोवर्द्धन पूजन, चीरहरण एवं रास पंचाध्यायी का विषद्‌ वर्णन करते हुए श्रोताओं के म...
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