शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन की नकारात्मक एनर्जी समाप्त होती है – याज्ञिक जी महाराज
वसुंधरा गाजियाबाद (21 सितंबर)
शिवलिंग के आकार में अपार ऊर्जा को नियंत्रित रखने की क्षमता होती है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन की नकारात्मक एनर्जी समाप्त होती हैश्री राम कृष्ण सेवा संस्थान के तत्वाधान में चल रहे धर्मार्थ औषधालय की सहायतार्थ शिव पुराण की कथा के दूसरे दिवस व्यासपीठ पर बिराजमान कथा व्यास पंडित जयप्रकाश याज्ञिक जी ने आज शिव पुराण की कथा प्रसंग समझाते हुए बताया कि शिव परब्रह्म हैं।प्रणव शिव का निष्कल निराकार रुप है।ऊॅं। शिव है,शिवलिंग प्रणवरुप है -शिव का।शिव महापुराण में स्वयं महादेव समझातें हैं -मेरी सम्पूर्ण शक्तियाॅं ऊॅं (प्रणव) में हैं।प्रणवाक्षर में त्रिदेवों की शक्ति होने के कारण यह मंत्र जप करने वाले भक्तों का कल्याण करने वाला है। शिवलिंग भगवान शिव का निराकार और अनन्त स्वरुप है।जो ब्रह्मांड की सर्जन -पालन -और संहार शक्ति का प्रतीक है!संस्कृत में लिंग शब्द का अर्थ प्रतीक अथवा चिह्न होता है,यह शरीर के किसी अंग का प्रतीक नहीं,, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है। विज्ञान और अध्यात्म के अनुसार शिवलिंग के आकार में अपार ऊर्जा को नियंत्रित रखने की क्षमता होती है। जिस प्रकार परमाणु संयंत्रों के नियन्त्रण कक्ष (nuclear reactor) का आकार होता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन की नकारात्मक एनर्जी समाप्त होती है,,मन में प्रसन्नता अनुभव होती है ।मन के बुरे विचारों से मुक्ति मिलती है। बेलपत्र और रुद्राक्ष भी सकारात्मक ऊर्जा के साधन हैं! हमारे द्वारा प्राणीमात्र की सु रक्षा के लिए वृक्षारोपण करना अति आवश्यक है। जलवायु को सुरक्षित रखने के साथ साथ वृक्ष हमारी पृथ्वी का श्रृंगार हैं। हमकों अपने जीवन काल में अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना होगा,बरगद,आम, पीपल,बेल और गुलर पंचमहाभूतों का संरक्षण करते हैं। इनके रोपण करने वाले भक्तों को शिव विष्णु भगवती दुर्गा श्रीगणेश जी और सूर्य नारायण की कृपा प्राप्त होती है।इनको एक साथ रोपण करने पर ये पंचवटी कहलाते हैं।श्रीराम जी ने पंचवटी में ही रह कर तप किया और नकारात्मक एनर्जी (आसुरी शक्तियों)पर विजय प्राप्त की।
आज की कथा में डॉक्टर बी के शर्मा श्री चंद्र शेखर मुदगल जी विजय मिश्रा जी के पी मिश्रा जी सत्य प्रकाश शर्मा। हरि ओम शर्मा डॉक्टर आशुतोष शर्मा जी एच एन द्विवेदी जी दीप चंद गुलाटी जी लोकेश शर्मा जी डी शर्मा जी हरि शंकर शर्मा शोभित पाठक विभा खन्ना जी कविता केहरी आदि सैकड़ो शिव भक्त उपस्थित रहे!
