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सत्य वचन

शिक्षक गुरु विषय का ज्ञान होना, विद्वान होना हैं । ज्ञान का प्रसार करना एक बड़ी सेवा हैं । परंतु विषय को जीना औऱ छात्रो को उसका अनुभव कराना, गुरुत्त्व हैं जो शिक्षक बनने से गुरु होने तक की एक यात्रा हैं ॥ प्रणाम सत्य प्रकाश शर्मा “सत्य”
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सत्य वचन

मनुष्य कहाँ हैं शून्य आंखो मे अब स्पंदन कहाँ हैं । अज्ञान , अंधता , अतिशय यहाँ हैं । दुर्लभ हुई चेतन जीवन की आशा ॥ अब अस्तित्व रह गए मनुष्य कहाँ हैं ॥ 1॥ थकती नही हैं ये व्यस्तता चीरायु सिमटी हैं करुणा अपान प्राण वायु मार्तण्ड , मूर्धन्य , सब मनीषी यहाँ हैं अस्तित्व रह गए हैं , मनुष्य कहाँ हैं ॥ 2॥ जीवन की डोर सबने पकड़ी हैं कसके । “सत्य”कशमकश मे पर जीता हैं हँसके । वीरान ,पाषण जंगल,के दृश्य यहाँ हैं । अस्तित्व रह गए हैं मनुष्य कहाँ हैं ॥ 3॥ संकल्पों का सागर यहाँ भरता हैं निशदिन । सुरसा सा मुख यहाँ बढ़ता हैं पल छिन । दशानन सा हर एक मनुष्य यहाँ हैं । अस्तित्व रह गए हैं मनुष्य कहाँ हैं ॥ रस हीन रिश्ते औऱ फीकी हँसी हैं । अपनो मे अपनी ही गांठे फंसी हैं । तेरा या मेरा हैं यही संशय यहाँ हैं ॥ अस्तित्व रह गए अब मनुष्य कहाँ हैं ॥ 4॥ सत्य प्रकाश शर्मा “सत्य...
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सत्य वचन

शुद्ध संकल्प से किये गये सतकर्म से जो प्राप्त होता हैं वही संतोष धन हैं । वही परम धन हैं । फिर यदि वो भौतिक संपत्ति भी हो तो उससे अहंकार नही आनन्द जी अनुभूति होती हैं । प्रणाम 🙏 सत्य प्रकाश शर्मा “सत्य”
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सत्य वचन

धन बल औऱ तन बल संपन्न मनुष्य प्रायः किसी अन्य को अपने आगे देखना पसंद नही करता हैं । ये रजो गुणी प्रवृति हैं। हाँ मन बल समृध्द व्यक्ति दूसरों का मनोबल स्वयं बढ़ाकर अग्रिम पंक्ति मे खड़ा देख प्रसन्न होता हैं । ये सतोगुणी प्रवृति हैं । प्रणाम 🙏 सत्य प्रकाश शर्मा “सत्य”
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