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माता-पिता का आशीष उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है – याज्ञिक जी

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अटल चौक, वसुन्धरा, गाज़ियाबाद – श्री राम कृष्ण सेवा संस्थान वसुंधरा द्वारा आयोजित महाशिवपुराण कथा आयोजन के पांचवे दिन व्यास पीठासीन “याज्ञिक” जी महराज ने पुत्र गणेश के द्वारा माँ पार्वती औऱ पिता शिव की परिक्रमा प्रसंग को समझाते हुए बताया की सन्तान के लिये माता पिता ही चलते फिरते साक्षात भगवान हैं । अतः माता पिता औऱ घर के बड़े बुजर्ग की सेवा पुत्र को जगत पूज्य बना देती हैं। यही उन्नति का साधन है। शिव औऱ जालंधर युध्द, सती वृंदा के सतीत्व आदि प्रसंगों को संसार जगत से जोड़ते हुए महराज जी ने शिव पुराण मे वर्णित गूढ़ रहस्यों का अर्थ समझाया । आज महराज जी ने यह भी संदेश दिया कि जल औऱ वनस्पति का संरक्षण परम आवश्यक है । औऱ जल जैसे अनमोल तत्व का संरक्षण हम गृहस्थी बहुत आसानी से कर सकते हैं । समाज स्वस्थ रहेगा तो देश स्वस्थ होगा। ये राष्ट्र सेवा का भी एक उत्तम साधन है। आ...
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संतोष, संयम और सहनशीलता के प्रतीक हैं सुदामा : याज्ञिक जी

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सहारनपुर : 9 अप्रैल 2018 :  श्री हरि मंदिर आवास विकास में श्री रामकृष्ण सेवा संस्थान के द्वारा आयोजित सप्ताह भर के श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का समापन करने से पूर्व कथाव्यास पं. जय प्रकाश याज्ञिक जी ने सुदामा और कृष्ण की मित्रता और भक्ति के रहस्य पर से पर्दा उठाते हुए बताया कि सुदामा जी ऐसे ही भगवत् भक्त हुए हैं जिन्होंने दुखों व अभावों को कभी अपनी और श्री कृष्ण की मित्रता के आड़े नहीं आने दिया। उनको जो भी मिला, संतोष के साथ ग्रहण किया।  पत्नी के बार – बार समझाने पर जब वह श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे तो सारी बात हुईं पर उनके मुख से वही नहीं निकला जो उनकी पत्नी ने समझा कर भेजा था।  उनका दृढ़ विश्वास था कि जीवन में प्रभु ने जो दिया है, वह कम नहीं और जो मिला है, उसे ही आवश्यकता पूर्ति का साधन समझना चाहिये। ...
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योग स्थूल से सूक्ष्म की ओर यात्रा है : योगाचार्य सुरेन्द्र

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सहारनपुर – 7 अप्रैल, 2018 :  योग साधना स्थूल से सूक्ष्म,प्रदर्शन से दर्शन,द्वंद्व से निर्द्वंद्विता और अनंत की ओर प्रयाण है। ‘योग’ साधक के जीवन की एक घटना है और यह उसी सुपात्र साधक के जीवन में घटती है जो गुरु मार्गदर्शन में योग के शास्त्रोक्त स्वरूप को समझ उसे जीवन आचरण में लाते हुए नियमित अभ्यास में गतिमान रहता है।इसलिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है योग के मूल स्वरूप को समझते हुए नियमित अभ्यास का सङ्कल्प लेते हुए नियमित अभ्यास करना। भले ही आप 10 मिनट से प्रारम्भ करें परन्तु करें नियमित। लोग प्रायः दीर्घ जीवन जीने की कामना तो करते हैं परंतु जीवन से प्रेम नहीं करते। समय रहते स्वयं के  लिए समय निकाल योगाभ्यास में नियमित होने में ही समझदारी है। आज सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए सूक्ष्म यौगिक क्रियाओं के अतिरिक्त  अर्धकटिचक्रासन, उत्कटासन, वज्रासन, अर्धताडासन, ...
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बिना आसक्ति के उपभोग ही श्रेष्ठ : भागवत भूषण

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सहारनपुर – 5 अप्रैल, 2018 :  हरि मंदिर, आवास विकास में श्री रामकृष्ण सेवा संस्थान (रजि.) द्वारा आयोजित श्रीमद्‍ भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे सत्र में कथा व्यास भागवत भूषण पं. जय प्रकाश जी ’याज्ञिक’ ने उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि शरीर धर्म के निर्वाह के लिये शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति करना आवश्यक है, और इनकी पूर्ति करना सामाजि...
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